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आइये जानते है आमवात के योग के बारे में।

 *आमवात योग*

आइये जानते है आमवात के योग के बारे में। 

*( गुरुवर जमदागनी सर के योग )*


१) पिंपळी + मरिच +टंकण संघव+ चित्रक+ लवण+ हिंगु+ त्वक तेजपत्र +एला जीरक + वीडलवण +विश्व+बचा+ गजपिप्पली+ यवक्षार धान्यक+ चव्य+ पिप्पलीमूल + अजमोदा


 २) अमृता + मुस्ता + विडंग +आरबध+ अर्कपत्र / मुळ+ रास्ना + अतिविषा अग्निमंथ+ देवदार लघुपंचमुळ+ एरंडमूळ


३) कज्जली + लोह+ ताम्र + शिलाजित+ जयमंगल रस+ त्रिफळा गुगुळ सकाळी मधुकासव / बिल्वादी क्षीरपाक सह


४) अभ्रक + शतावरी +गुडूची सत्व + मकरध्वज बंग + सुवर्ण माक्षिक +सुवर्ण+ रौप्य +लक्ष्मीविलास +ताप्यादी महावातविध्वंस + गुग्गुळ + नागार्जुनाभ्रक+ पन्नापिष्ठी+ राजावर्त + अश्वगंधा सिरप व अमृता सिरप


*Frequently used in patients during summer season*

*(गुरुवर जमदागनी सर के योग )*

*चंदनादि पानक:*
चंदन + रक्तचंदन + उशीर + मुस्ता कमलपुष्प+ पित्तपापडा
Use in :
तृष्णाशामक दाहशामक

*चंदनादि क्वाथ*
(1): (भै.र. ओजोमेह ४७७)
चंदन +रक्तचंदन + तुरटी +आमलकी मनुका +उशीर अमृता यष्टी
Use in -
उपद्रवयुक्त प्रमेह, रक्तमेह, हरिद्रमेह, मंजिष्ठामेह


*चंदनादि क्वाथ*
(2):(भ.र. ओजोमेह ४७९)
चंदन + बाभूळडिक +प्रियंगु जम्बुबीज + आम्रबीज+ मुस्ता + अजवायन +अमृता इंद्रयव+ मोचरस +लोहभस्म
Use in :
पूय लसिका रक्तयुक्त संपुर्ण प्रमेह, तृष्णा, ज्वर, अग्निमांदय, अरुचि

*युक्ति अनुसार प्रयोग करें*


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