आयुर्वेद मतानुसार अनुर्जता (एलर्जी) की चिकित्सा करते समय निम्न बातों का ध्यान रखना चाहिये
1. सबसे पहले उस कारण को जानना चाहिये जिससे रोग उत्पन्न हुआ है, जैसे धूल, धुआं आदि से उत्पन्न जुक़ाम, खांसी, सूर्य की तीव्र धूप से उत्पन्न त्वचा के रोग, विभिन्न प्रकार के रोग आदि में कारण से दूर रहने की कोशिश करनी चाहिये।
➖एलर्जी से उत्पन्न सर्दी (जुकाम) में चिकित्सा
• काले जीरे का चूर्ण सूंघने से लाभ होता है ।
• गुड़ और अदरक मिलाकर खाना चाहिये।
• काली मिर्च,गुड़ को दही में मिलाकर पीना चाहिये। तेजपात, छोटी इलायची, दालचीनी और नागकेसर समान मात्रा में लेकर कपड़छन चूर्ण बनाकर सूंघें ।
• कपड़े में कलौंजी या कपूर बांधकर सूंघने से लाभ हो जाता है।
• अदरक को चाय की तरह पानी में उबालकर दूध चीनी मिलाकर पीयें।
• कालीमिर्च, पिसी हल्दी और काला नमक समान मात्रा में लेकर एक कप पानी डालकर उबालें, पानी आधा रहने पर छानकर पीने से जुकाम दूर हो जाती है।
• सरसों का तेल दोनों नासाछिद्रों में नहाने से पहले तथा सोने से पहले डालने पर जुकाम होने से बचा जा सकता है ।
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वैद्यकीय उपचार
1. सितोपलादि चूर्ण 1 ग्राम, मुलैठी चूर्ण 500 मि.ग्रा. त्रिकटु चूर्ण 500 मि.ग्रा., श्रृंगभस्म 250 मि.ग्रा. यह एक मात्रा है, यह मात्रा सुबह-शाम शहद या अदरक के रस से दें।
2. लक्ष्मी विलास रस 1-1 गोली सुबह-शाम शहद से।
3. षडबिन्दू तैल- 4-4 बूंद दिन में दो बार नाक में डालें।
मुख्य बात --जल नेति सूत्र नेति को सीखें और आयु भर के लिए रोग मुक्त हो जाएं

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