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महिलाओं में होने वाले 3 सामान्य बीमारियां कान का दर्द, शक्ति, मासिक धर्म, प्रसूता स्त्री का सिर चकराना,टायफाइड में अफारा होने पर करे ये इलाज


 


💚कान का दर्द – 

हींग को तिल के तेल में पकाकर उस तेल को छानकर इस तेल की बूंदें कान में डालने से कान दर्द से राहत मिलती है।


💚शक्ति

शारीरिक शक्ति बढ़ाने या कमजोरी दूर करने के लिए भुनी हींग, पीपर, सोंठ तथा कालीमिर्च बराबर मात्रा में लेकर पीस लें। प्रतिदिन सुबह-शाम चौथाई चम्मच चूर्ण गरम पानी के साथ सेवन करें।


💚मासिक धर्म

मासिक धर्म की समस्याओ में हींग का सेवन करने से स्त्रियों के गर्भाशय का संकुचन होता है और मासिक धर्म खुलकर आता है। इसके अतिरिक्त इससे स्त्रियों का पेट दर्द भी दूर होता है।


💚प्रसूता स्त्री का सिर चकराना –

घी में सेंकी हुई हींग देशी घी/गाय का घी के साथ सेवन करने से प्रसूता स्त्री को आने वाले चक्कर (सिर चकराना) और दर्द (लेबरपेन्स) मिटते हैं।


💚विषैले दंश :-

बिच्छू, ततैया, मधु मक्खी आदि के काटने पर काटे गए अंग पर लगाने से दर्द और सूजन दूर होते हैं।




💚मलेरिया से सुरक्षा – 

जिन जगहों पर मलेरिया फैला हो वहां भोजन के साथ हींग का सेवन करने से आंतों को लाभ होता है तथा मलेरिया से भी सुरक्षा होती है।


💚टायफाइड में अफारा होने पर -

टायफाइड/मोतीझरा बुखार में रोगी को अफारे (पेट फूलने) की समस्या होने पर हींग को नौसादर और हीरा बोल के साथ सेवन कराना लाभकारी है।


💜हींग को लम्बे समय तक प्रतिदिन सेवन न करें। जिन स्त्रियों को मासिक स्राव/माहवारी अधिक हो उन्हें तो हींग का सेवन बंद कर देना चाहिए ।


💜गर्भवती स्त्रियां इसका सेवन कम ही करें। पित्त प्रकृति/गर्म तासीर के लोग हींग को केवल औषधि/दवा के तौर पर ही सेवन करें।


💜दूध पीने वाले शिशु को यदि गर्मी की समस्या है हो तो ऐसी स्त्रियों को हींग का सेवन नहीं करना चाहिए।


💜अधिक समय तक हींग सेवन मूत्र मार्ग में जलन होती है |


💜अधिक हींग के सेवन से पेशाब और पसीने से बदबू आने लगती है। हींग मस्तिष्क (दिमाग) को और गर्म प्रकृति/मिजाज के लोगों के लिए हानिकर है। 


💜इसके अतिरिक्त हींग लीवर की बीमारी से पीड़ित लोगो के लिए भी हानिकारक है।


इलाज से बेहतर बचाव है

स्वदेशी बने प्रकृति से जुड़े

धन्यवाद

🙏

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