वजन बढ़ाने के उपाय
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💛ड्राई फ्रूट्स खाकर आप तुरंत वजन बढ़ा सकते हैं. कैलोरी की मात्रा अधिक होने के साथ ही ये पौष्टिक भी होते हैं
💛रोज 50ग्राम भीगे हुए चने खायेँ
💛 आलू कार्बोहाइड्रेट और शुगर का अच्छा स्रोत्र है। अधिक आलू का सेवन करने से फैट की मात्रा बहुत बढ़ जाती है। आलू को भूनकर खाने से तीव्रता से मोटापा बढ़ता है.
💛 पनीर (चीज़) के एक पैकेट में तकरीबन 69 कैलोरी होती है। पनीर में भरपूर मात्रा में दूध होने के कारण काफी अधिक प्रोटीन, कोलेस्ट्रॉल, कैल्शियम और फैट पाया जाता है.
💛 लंबे समय तक मोटापा बरकरार रखने के लिए मक्खन का सेवन बेहतर विकल्प है लेकिन मक्खन का सेवन कम मात्रा में होना चाहिए. ज्यादा मक्खन का सेवन करने से ह्रदय संबंधी रोग हो सकते हैं.
💛5 किलो गेंहू में, 2 किलो चने, 1 किलो सोयाबीन की ख़ली, 500 ग्राम तिल की ख़ली मिलाकर रोटियां खाये
💛रात में भैंस के दूध में 1 केला मिलाकर पिएं
इलाज से बेहतर बचाव है
स्वदेशी बने प्रकृति से जुड़े
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💚चाय ,काफी बन्द करे
💚शक्कर का सेवन या इससे बने पदार्थ बन्द
💚कोल्ड्रंक बन्द
💚मैदा से बना हुआ कुछ न खाए
💚भैंस का दूध घी दहिं न खाए
💚सोयाबीन न खायेँ
वजन कम करने के उपाय:-
💙पानी का नियम बदले
💙खाने का नियम बदले
💙कपालभाति और अनुलोम विलोम करे
💙रोज 2 आवंले खाये मुरब्बा नही
💙रोज 10,000 कदम टहलें
💜भोजन में सलाद और फल शामिल करें
💜आधा चम्मच त्रिफलां सुबह शहद या गुड़ के साथ 3 माह लगातार खाली पेट
💜1 चमच्च मेथीदाना 1 कांच के गिलास में डाले, गर्म पानी करके उसे शाम को भरकर रख दे सुबह उठकर सबसे पहले इस पानी को पिये मेथी चबाकर खाएं
💜लौकी का जूस सुबह 3 माह लगातार
इलाज से बेहतर बचाव है
स्वदेशी बने प्रकृति से जुड़े
धन्यवाद
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बल,आयु,रुप और गुण प्रदान करने वाला भोजन महज स्वाद के लिए खाई जाने वाली चीज़ नही है।इसीलिए प्राचीन भारतीय ग्रंथो में भोजन के कुछ महत्वपूर्ण नियम बताए गए हैं, जिनका आधार शरीर क्रिया विज्ञान, चिकित्सा और मनोविज्ञान है।
•भोजन हमेशा एकांत मे(शांत जगह)में ही करना चाहिए। -वशिष्ठस्मृति, स्कंदपुराण।
•दोनों हाथ,दोनों पैर और मुख, इन पाँच अंगो को धोकर ही भोजन करना चाहिए,ऐसा करने वाला शतायु होता है।
- पद्मपुराण,सुश्रुतसंहिता,महाभारत
•भोजन करते समय मौन रहना चाहिए। -स्कंदपुराण
•परोसे हुए भोजन की निंदा नही करनी चाहिए।वह स्वाद मे जैसा भी हो उसे प्रेम से ग्रहण करना चाहिए।
-महाभारत, तैत्तिरीयोपनिषद
•रात मे भरपेट भोजन नही करना चाहिए। -स्कंदपुराण
•सोने की जगह पर बैठकर खान-पान न करें,हाथ मे लेकर भी कुछ न खाएं अर्थात् पात्र मे लेकर ही खाएं।
-मनु स्मृति, सुश्रुतसंहिता
•बहुत थकान हो तो आराम करने के पश्चात् ही कुछ खाएं-पीएं।अधिक थकावट की स्थिति मे कुछ भी खाने से ज्वर या उल्टी होने की आशंका रहती है।
-नीतिवाक्यामृतम्
•जूठा किसी को न दें और स्वयं भी न खाएं,चाहे वह आपका छोड़ा हुआ अन्न ही क्यो न हो।भोजन के बाद जूठे मुंह कहीं न जाएं अर्थात् मुँह धोकर ही जाएँ।
-मनुस्मृति
•जो सेवक स्वयं भूख से पीड़ित हो और उसे आपके लिए भोजन लाना पड़े तो ऐसा भोजन ग्रहण नही करना चाहिए। जो आपके प्रति प्रेम,स्नेह नही रखता उसका अन्न भी नही खाना चाहिए।
-चरकसंहिता
•खाने की चीज़ो को गोद मे रखकर नही खाना चाहिए।
-बौधायनस्मृति,कुर्मपुराण
•अंधेरे मे,आकाश के नीचे,देवमंदिर मे भोजन नही करना चाहिए।इसी तरह एक वस्त्र पहनकर, सवारी या बिस्तर पर बैठकर,जूते-चप्पल पहने हुए और हँसते या रोते हुए भी कुछ नही खाना चाहिए।
-कुर्मपुराण

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